कवि डाकू





एक कवि गरीबी से तंग आकर डाकू बन
गया और एक बैंक लूटने जा पहुंचा.
बन्दूक लहराते हुए बोला -
“अर्ज किया है …
तकदीर में जो है वही मिलेगा …
हैंड्स अप ! … कोई अपनी जगह से
नहीं हिलेगा … !”
फिर कैशियर से बोला -
“कुछ ख्वाब मेरी आँखों में से निकाल
दो …
जो कुछ भी है जल्दी से इस बैग में डाल
दो … ”
माल समेटने के बाद पब्लिक से बोला -
“बहुत कोशिश करता हूँ तेरी याद
भुलाने की …
ख़बरदार जो किसी ने कोशिश
की पुलिस बुलाने की … ”
जाते-जाते बैंक के गार्ड से बोला -
“भुला देना मुझको क्या जाता है
तेरा …
मैं गोली मार
दूंगा जो पीछा किया मेरा … !!!