99-क्लब

एक रानी थी.अपने विलासितापूर्ण जीवन के बावजूद वो हमेशा असंतुष्ट रहती थी।
एक दिन उसने अपने एक नौकर को खुशी से गाते देखा. मैं रानी हूँ लेकिन ये नौकर गरीब होते हुए भी इतना खुश क्यों है, रानी ने सोचा. 
तुम इतना खुश क्यों हो? रानी ने पूछा..
नौकर बोला- रानी जी,मैं एक साधारण सा नौकर हूँ,मुझे और मेरे परिवार को ज़्यादा कुछ नहीं चाहिए - केवल एक छत और थोड़ा खाना पेट भरने के लिए... जो मेरे पास है.. इसलिए मैं खुश हूँ।
रानी को इससे संतोष नहीं हुआ।
बाद मे रानी ने अपने मंत्री से पूछा,मंत्री बोला - महारानी, शायद ये नौकर अब तक क्लब-99 का हिस्सा नहीं है.
क्लब-99? ये क्या है? रानी ने पूछा.
मंत्री बोला -  ये जानने के लिए आपको 99 सोने के सिक्कों से भरा बैग नौकर के दरवाजे पर डालना होगा.
जब नौकर ने बैग देखा तो उसे घर ले गया.जब उसने बैग खोला तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा... इतने सारे सिक्के। कई बार गिनने के बाद जब केवल 99 सिक्के ही मिले तो उसने सोचा ....... कोई 99 क्यों छोड़ेगा. 
उसने सब जगह ढूंढा.. लेकिन एक सिक्के का कोई पता नहीं लगा. नौकर ने निश्चय किया कि अब वो और मेहनत करेगा और 100 सिक्के पूरे करेगा.
उस दिन से नौकर की जिंदगी बदल गयी. वो बहुत मेहनत करने लगा और अपने परिवार पर उसकी मदद ना करने का आरोप लगाने लगा।
उसने गाना छोड़ दिया।
जब रानी ने ये बदलाव देखा तो उसे समझ नहीं आया.उसके मंत्री ने कहा -  महारानी, अब ये पक्का क्लब-99 मे शामिल हो गया है।
ये 99-क्लब उन लोगों का है जिनके पास ख़ुश होने के लिए सब कुछ है लेकिन उससे संतुष्ट ना होके वो उस 1 के लिए हमेशा भागते रहते हैं।
और अपने से कहते हैं -  बस सिर्फ एक वो चीज मिल जाए और मैं खुश हो जाऊंगा. सिर्फ थोड़ी चीजों से भी हम आसानी से खुश हो सकते हैं लेकिन जैसे ही हमे कुछ बड़ा मिलता है... हम और चाहने लगते हैं चाहे उसके लिए अपनी नींद अपनी खुशी छोड़नी पड़े या हमारे साथ के लोगों को ठेस ही क्यों ना पहुंचानी पड़े.