दर्द बढ़ कर

दर्द बढ़ कर फुगाँ ना हो जाये
ये ज़मीं आसमाँ ना हो जाये

दिल में डूबा हुआ जो नश्तर है
मेरे दिल की ज़ुबाँ ना हो जाये

दिल को ले लीजिए जो लेना हो
फिर ये सौदा ग़राँ ना हो जाये

आह कीजिए मगर लतीफ़-तरीन
लब तक आकर धुआँ ना हो जाये

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