तुझसे मेरी बात हुई
सहरा में बरसात हुई
जल्दी-जल्दी दिन बीता
धीरे-धीरे रात हुई
आँखें छलकीं होंठ हँसे
कैसी-कैसी बात हुई
एक हँसी दुखदाई थी
एक हँसी सौग़ात हुई
खेल अभी तो जारी है
किसकी शह या मात हुई
आँख मिलाये सूरज से
कब किसकी औक़ात हुई
हैवानों से बदतर क्यों
इंसाँ तेरी ज़ात हुई
-सौरभ
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