टूटे हुए साज़ों को कोई आवाज़ दे गया
कोई बेजुबां जुबां को अल्फाज दे गया ।
ठहरा था समंदर कोई दिल की दयार में
धड़कन की मौज में कई शैलाब दे गया।
रुख़ पे लिखी है उसने अश्को से कहानी
वो यूं हर सवाल का मेंरे जवाब दे गया ।
कल का नहीँ भरोसा क्यों न आज जी लें
ये सौगात ए ज़िंदगी मुझे वो आज दे गया।
जिसे ढूँढ़ने में दिल ने सदियां गुज़ार दीं
हमराज बना दिलके वो सब राज दे गया।
झोंका हवा का जानिब छूकर गुज़र गया
जैसे के प्यार का मुझे वो आगाज दे गया।
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