वो अपनी ही कही बात से...पलट गया।
मुद्दतो बाद मिला तो मुझसे लिपट गया।।
तेरी बेवफाई का रंज तो बहुत हुआँ मुझे।
पर अच्छा हुआ आँख का पर्दा हट गया।।
इतनी बेरुखी भी अच्छी नही होती सनम।
लिफाफा नही खुला और खत फट गया।।
तेरे इश्क में बस....नींदो को खोया है मैंने।
सौदा तो महंगा था मैं सस्ते में निपट गया।।
इक सच की दुनिया, इक आभासी दुनिया।
'सागर' आदमी कितने टुकड़ो में बट गया।।
सुबोध 'सागर'
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