सब पूछ रहें हैं तेरा-मेरा क्या है रिश्ता ,
चल इश्क़ का इज़हार सरेआम हो जाये |
जैसे जुल्फों की लट है चेहरे के करीब तेरे ,
मेरे लबों का ऐसा ही कोई इंतज़ाम हो जाये |
थक जाती है कलम जिसको बयाँ करते-करते,
उस हुस्न के आगे हर लफ्ज़ नीलाम हो जाये |
मैं नहीं जानता वो कौन सी बात है तुझमें ,
जो तुझे देखकर दिल को आराम हो जाये|
झुका कर पलकें जब मुस्कुरा देती हो तुम ,
ये शर्माना ही मेरी ग़ज़लों का इनाम हो जाये |
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