देखूं तो ज़रा, घाव है क्या?
रिश्तों में कुछ तनाव है क्या?
पूछा नहीं था हाल एक अरसे से
आज पूछ लिया, जुड़ाव है क्या?
जाने-अनजाने जो अपने हुए बेगाने
बचा किसी में कुछ, झुकाव है क्या?
शब्दों के संसार में शब्द तो बहुत हैं
भावों के भँवर में कुछ, भाव हैं क्या?
न पूछा मैंने और न बोले तुम
तेवर में अभी भी, ताव है क्या?
संबंधों को आजकल सर्दी लगी है
गर्म करने को कुछ, अलाव है क्या?
पार होने से पहले हज़ार हिचकोले
यही ज़िन्दगी की, नाव है क्या?
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