किसी के इश्क़ में ऐसा संवर गया हूँ मैं
सभी ने ग़ौर से देखा जिधर गया हूँ मैं
कुछ ऐसा डूब गया हूँ किसी की आँखों में
समन्दरों की तहों में उतर गया हूँ मैं
तेरी वफ़ा ने दिखाई है रौशनी मुझको
तमाम उम्र सफ़र में जिधर गया हूँ मैं
सजा के रक्खी है अल्फ़ाज़ में तेरी तस्वीर
ग़ज़ल के साथ फ़ज़ा में बिखर गया हूँ मैं
रहा 'निज़ाम' से 'ख़ुसरो' का इश्क़ जो '
तेरे लिये उसी हद से गुज़र गया हूँ मैं
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