लाख कसमे दी, लालच दिए,
पर जाने वाले कभी लौटे नहीं,
सिर्फ राहों में उड़ते हुए सन्नाटो
का गुबार छोड़ गए,
आखिर कोई कब तक
सन्नाटे फांकता रहे,
जिंदगी तो चलती रहती है,
सिर्फ गिले रह जाते हैं और,
वफाओं में झुके हुए सजदे,
के शायद कोई आए,
कोई आवाज़ दे कहीं से...
#गुलज़ार साहब
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