एक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकत जनवरी 21, 2018 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप एक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकते ये बात किसी और से कह भी नहीं सकते तू अपने गहन में है तो मैं अपने गहन में दो चाँद हैं इक अब्र में गह भी नहीं सकते हम-जिस्म हैं और दोनों की बुनियादें अमर हैं अब कैसे बिछड़ जाएँ कि ढह भी नहीं सकते टिप्पणियाँ
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