इक हुनर था कमाल था क्या था?
मुझमें तेरा जमाल था क्या था ..?
तेरे जाने पे अब के कुछ न कहा
दिल में डर था मलाल था क्या था?
हम तक आया तू बहर-ए-लुत्फ़-ओ-करम,
तेरा वक़्त-ए-जलाल था क्या था •••?
जिसने मुझे तह से उछाल दिया,
डूबने का ख़याल था क्या था••?
जिस पे दिल सारे अहद भूल गया,
भूलने का सवाल था क्या था?
तितलियाँ थे हम और क़ज़ा के पास
सुर्ख़ फूलों का जाल था क्या था?
*परवीन शाकिर*
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