बहुत पानी बरसता है तो मिट्टी बैठ जाती है ,

बहुत पानी बरसता है तो मिट्टी बैठ जाती है , 

 न रोया कर बहुत रोने से छाती बैठ जाती है , 

यही मौसम था जब नंगे बदन छत पर टहलते थे, 

यही मौसम है अब सीने में सर्दी बैठ जाती है , 

चलो माना कि शहनाई मोहब्बत की निशानी है, 

मगर वो शख़्स जिसकी आ के बेटी बैठ जाती है,

बढ़े बूढ़े कुएँ में नेकियाँ क्यों फेंक आते हैं ?

कुएँ में छुप के क्यों आख़िर ये नेकी बैठ जाती है ?

नक़ाब उलटे हुए गुलशन से वो जब भी गुज़रता है,

समझ के फूल उसके लब पे तितली बैठ जाती है ,

सियासत नफ़रतों का ज़ख्म भरने ही नहीं देती,

जहाँ भरने पे आता है तो मक्खी बैठ जाती है ,

वो दुश्मन ही सही आवाज़ दे उसको मोहब्बत से ,

सलीक़े से बिठा कर देख हड्डी बैठ जाती है.

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